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bharat ki nadiya map in hindi | भारत की नदियाँ | river in hindi

दोस्तों आज हम लेकर आये है आपके लिए bharat ki nadiya map in hindi एक -एक करके सारी मुख्य नदियों की जानकारी है इस पोस्ट में और साथ में मैप भी है

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सिंधु नदी तंत्र सिंधु नदी

सिंधु भारतीय उपमहाद्वीप का एक महत्वपूर्ण अपवाह-तंत्र है। इसकी लंबाई 2880 किमी. है तथा भारत में इसकी लंबाई 709 किमी. है। सिंधु का उदगम बोखर-चू हिमनद से होता है, जो कैलाश श्रेणी (6714 मीटर) के उत्तरी ढाल पर स्थित है।

सिंधु नदी तंत्र

झेलम (तिस्ता)

● झेलम का उद्गम एक जल स्रोत से वेरीनाग में होता है, जो कश्मीर घाटी के दक्षिणी पूर्वी भाग में स्थित है। यह उत्तर-पश्चिम में लगभग 110 किमी. तक बहती है

जहां यह बुलर झील में प्रवेश करती है तथा बारामुला से आगे अनुप्रवाह में यह एक 2130 मीटर गहरे महाखड्ड में प्रवेश करती है और मुजफ्फराबाद (पाकिस्तान) की ओर मुड़ जाती है। यह ट्रीम्मू में चेनाब से जाकर मिल जाती है।

चेनाब नदी (आस्किनी)

यह भारत में लगभग 1180 किमी. तक बहती है। चेनाब नदी को हिमाचल प्रदेश में चन्द्रभागा कहा जाता है। चंद्र और भागा इसकी 2 सहायक नदियां है जिनका उद्गम लाहौल जिले के बारालाचा दर्रे से होता है। नीचे की ओर उनका संगम टांडी में होता है। एकजुट होने के बाद चेनाब पीर पंजाल तथा वृहत् हिमामलय के बीच बहती है।

किश्तवार के निकट यह नदी एक ऊँची-मोड़ लेकर पीरपंजाल को रिआसी में पार कर पाकिस्तान में प्रवेश करती है। चेनाब नदी पर बनी महत्वपूर्ण जल-बिजली परियोजना, बगलिहार, सलाल तथा दुलहस्ती है।

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रावी (पुरुषणी अथवा इरावती)

भारत में यह नदी 725 किमी. तक बहती है। रावी कुल्लू में रोहतांग दर्रे के निकट से निकलती है, यह व्यास नदी के स्रोत के निकट है। यह नदी पीर पंजाल के पश्चिमी ढाल को तथा धौलाधर श्रेणी के उत्तरी ढाल को अपवाहित करती है। चम्बा शहर के नीचे यह नदी दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुड़ती है।

धौलाधर श्रेणी में यह एक महाखड्ड बनाते हुए पंजाब के मैदान में प्रवेश करती है। पंजाब के मैदान में यह नदी भारत-पाक सीमा के साथ-साथ बहती है, गुरदासपुर तथा अमृतसर जिले के साथ-साथ बहने के बाद यह नदी पाकिस्तान में प्रवेश करती है।

व्यास नदी (विपाशा अथवा अ॒र्गीकिया)

व्यास नदी का स्रोत व्यास कुंड है, जो कुल्लू के रोहतांग दर्रे (4000)मीटर) के दक्षिणी फलक के निकट है, जहां यह नदी कुछ किमी. तकबहती है जिसके बाद यह धौलाधर श्रेणी को काटती है तथा कोटी एवं । लार्जी के निकट एक गहरे महाखड्ड का निर्माण करती है।

अंत में कपूरथला तथा अमृतसर जिले से होकर गुजरती है तथा सतलज में जाकर हरिके (भारत में) के निकट मिलती है।

सतलज (सातुद्री)

सतलज नदी का उद्गम राकास ताल से होता है। यह एक पूर्ववर्ती नदी है, जिसे तिब्बत में लांगचेन खम्भाब कहते हैं। यह नदी जास्कर तथा वृहत् हिमालयी श्रेणी में महाखड्ड का निर्माण करती है।

शिपकीला दर्रे (4300 मीटर) के निकट यह हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, जहां यह जास्कर श्रेणी से होकर बहती है। यहां से नदी पश्चिम की ओर मुड़ती है। तथा कल्पा को पार कर रामपुर के निकट धौलाधर श्रेणी को एक संकीर्ण महाखड्ड के द्वारा पार करती है।

शिवालिक से गुजरती इस नदी पर भाखड़ा गांव के समीप एक महाखड्ड पर भाखड़ा बांध का निर्माण किया गया है। भाखड़ा बांध के नीचे रोपड़ में यह नदी पंजाब के मैदान में प्रवेश करती है। भारत में इस नदी की लम्बाई 1050 किमी. है। घाघरा (पौराणिक सरस्वती)

यह एक अंत: स्थलीय अपवाह है, जो अम्बाला (हरियाणा) के निकट सिरमुर के शिवालिक के पाद मलवा पंख से निकलती है। मैदान में प्रवेश करने के बाद यह विलुप्त हो जाती है परंतु करनाल जिले में फिर से प्रकट हो जाती है, जो बीकानेर के नजदीक हनुमानगढ़ में लुप्त हो जाती है।

लार्जी के निकट एक गहरे महाखड्ड का निर्माण करती है। अंत में कपूरथला तथा अमृतसर जिले से होकर गुजरती है तथा सतलज में जाकर हरिके (भारत में) के निकट मिलती है।

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गंगा नदी तंत्र

गंगा बेसिन (लम्बाई: 2525 किमी.)

bharat ki nadiya में गंगा सबसे बड़ी नदी है गंगा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में माना दर्रे के निकट गोमुख | हिमनद (लगभग 7000 मीटर) से निकलती है। इस नदी को भागीरथी | कहते हैं जो वृहत् हिमालय तथा लघु हिमालय में संकीर्ण महाखड्डों का निर्माण कर आगे बढ़ती है। देवप्रयाग में भागीरथी अलकनंदा से मिल जाती है, अलकनंदा का स्रोत सतोपंथ हिमनद (7800 मी.) है, जो बद्रीनाथ के उत्तर में तथा नीती दर्रे के निकट स्थित है। देव प्रयाग में भागीरथी तथा | अलकनंदा के संगम के बाद यह नदी गंगा कहलाती है।

गंगा नदी तंत्र

● राजमहल पहाड़ियों के नजदीक फरक्का बैराज/ बांध (पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में) के नीचे यह दक्षिण पूर्व दिशा में मुड़ जाती है। बैराज | के बाद यह नदी दो भागों में विभक्त हो जाती है। भागीरथी हुगली तथा – पद्मा। हुगली कोलकाता से होकर गुजरती है, वहीं पदमा बांग्लादेश में प्रवेश करती है। वर्तमान में हुगली बंगाल डेल्टा की सबसे पश्चिमी वितरिका है। हुगली एक ज्वारीय नदी है, जिस पर कोलकाता बंदरगाह | अवस्थित है।

यमुना नदी (लंबाई: 960 किमी.)

यह गंगा की सबसे लंबी तथा सबसे पश्चिमी सहायक नदी है। इस नदी का स्रोत यमुनोत्री हिमनद है, जो बंदरपुंछ (6316 मीटर) के पश्चिमी ढाल पर अवस्थित है। नीचे की ओर मसूरी श्रेणी (उत्तराखंड) के पीछे इसमें टोन्स नदी आकर मिलती है। मसूरी श्रेणी से यह नदी मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है, जहां यह एक चौड़े वक्र के रूप में बहती है। हरियाणा तथा
उत्तर प्रदेश के बीच एक सीमा बनाते हुए यह नदी दिल्ली, मथुरा ए आगरा होकर गुजरती है तथा दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है जहां इलाहाबाद में इस नदी का संगम गंगा के साथ होता है।

चम्बल (लम्बाई 960 किमी)

२ चम्बल नदी का उद्गम स्थान विंध्य श्रेणी में मालवा पार दक्षिण-पश्चिम में मऊ कैंट के निकट है तथा यह नदी उत्तर की ओ कोटा शहर तक बहती है। कोटा से आगे यह नदी उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ जाती है तथा बुंदी, सवाई माधोपुर एवं धौलपुर को पार कर इटावा में – लगभग 40 किमी. पश्चिम यह नदी यमुना में जाकर मिल जाती है। अरावली श्रेणी से निकलने वाली बनास नदी इसकी मुख्य बाएं तट की सहायक नदी है। मालवा पठार से निकलने वाली काली सिंध तथा पर्वत । इसके दाहिने तट की सहायक नदियां हैं। चम्बल नदी अपने विस्तृत बीहड़ भूमि खड्ड के लिए प्रसिद्ध है।

रामगंगा

यह तुलनात्मक रूप से एक छोटी नदी है, जो कुमाऊं हिमालय से | निकलती है। यह नदी शिवालिक को पार कर गंगा के मैदान में नजीबाबाद । में प्रवेश करती है। यह हरदोई जिले में कन्नौज के प्रतिमुख गंगा में जाकर मिलती है।

शारदा

यह नदी नेपाल में हिमालय के मिलाम हिमनद से निकलती है, जहां इसे गौरी गंगा कहा जाता है। इस नदी को अनेक नाम से जाना जाता है, जैसे- काली, जब यह भारत-नेपाल सीमा के समानांतर बहती है। बाराबंकी | के निकट घाघरा में मिलने से पहले इस नदी को चौका कहा जाता है।

कर्नाली

कर्नाली को नेपाल के हिमालयन क्षेत्र में कैरीआला कहते हैं, जो गंगा के मैदान में घाघरा बन जाती है। कर्नाली एक पूर्ववर्ती नदी है, जो नेपाल के हिमालय में मानधाता चोटी (7220 मीटर) से निकलती है।

मैदानी क्षेत्र में इसमें शारदा नदी आकर मिलती है, जहां यह नदी घाघरा कहलाती है, जिसका अर्थ है- लहंगा । अयोध्या तथा फैजाबाद शहर को पार करते हुए यह नदी बलिया शहर के निकट छपरा में गंगा से मिलती है।

गंडक

गंडक नदी का उद्गम स्थान नेपाल के हिमालय में धौलागिरि तथा एवरेस्ट की चोटी के मध्य है एवं यह नेपाल के केंद्रीय भाग को अपवाहित करती है। यह नदी भारत के वृहत् मैदान में बिहार के चम्पारण जिले में प्रवेश करती है तथा दक्षिण-पूर्व की ओर मुड़कर यह पटना शहर के | प्रतिमुख सोनपुर में गंगा से मिल जाती है।

कोसी

यह एक पूर्ववर्ती नदी है। इस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। अरूण इसकी मुख्य धारा है जो एवरेस्ट चोटी के उत्तरी ढाल से निकलती । है। नेपाल में वृहत् हिमालय में प्रवेश करने के बाद इस धारा में पश्चिम से सन-कोसी तथा पूर्व से तामूर-कोसी आकर मिलती है। ये दोनों नदियां कुछ दूर तक समानांतर तथा महाभारत श्रेणी के उत्तर में बहती है एवं अरूण | नदी से मिलकर सप्त कोसी कहलाती है। यह नदी महाभारत श्रेणी तथा शिवालिक पहाड़ियों के बीच बहती है तथा बिहार के मैदान में सहरसा जिले में छत्रा के निकट प्रवेश करती है।

महानंदा नदी

यह नदी पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पहाड़ियों से निकलती है। सिलिगुड़ी के नजदीक यह तीक्ष्ण वक्र बनाते हुए यह गंगा नदी से मिलती | है। यह गंगा के उत्तरी तट की सबसे अंतिम सहायक नदी है ।

सोन (लम्बाई: 780 किमी.)

यह अमरकंटक के पठार से निकलती है, जो नर्मदा के स्रोत से अधिक । दूर नहीं है। यह नदी पठार से जलप्रपातों के एक क्रम के रूप में निकलती । है तथा कैमूर श्रेणी से जाकर मिलती है जो इसकी धारा को उत्तर पूर्व की ओर मोड़ देती है तथा यह एक नतिलम्ब घाटी में आगे बढ़ती है। गरवा में
यह 5 किमी. तक चौड़ी हो जाती है तथा अंततः आरा के नजदीक बांकीपुरा में गंगा से मिल जाती है।

केन

5 केन नदी मालवा के पठार से निकलकर पन्ना जिले से बहती हुई उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में यमुना नदी से मिल जाती है। सोनार एवं बीवर ■ इसकी मुख्य सहायक नदियां हैं।

दामोदर नदी

दामोदर छोटानागपुर पठार के पूर्वी भाग को अपवाहित करती है। यह नदी पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है तथा आसनसोल के समीप एक ■ संकीर्ण-स्थान में बंगाल के डेल्टा-मैदान में प्रवेश करती है। आसनसोल के आगे इस नदी में बराकर नदी आकर मिलती है, जो इस नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। फाल्टा (कोलकाता के उत्तर) यह नदी हुगली से मिलती है।

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

ब्रह्मपुत्र नदी

इस नदी का उदगम मानसरोवर झील के पूर्व में स्थित आंग्सी ग्लेशियर से होता है। इस नदी को तिब्बत में सांगपो कहते हैं। नामचा बरवा के | निकट यह वृहत् हिमालय (7755 मीटर) में प्रवेश करती है। भारत में यह नदी ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। यह नदी असम में पश्चिम की ओर धुबरी तक बहती है तथा आगे यह नदी एक तीक्ष्ण दक्षिणी मोड़ लेकर | बांग्लादेश में प्रवेश करती है।

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

● पासी घाट के नीचे, इस नदी में अनेक सहायक नदियां आकर मिलती है, जैसे-सुबनसिरी, भरेली, मानस, तिस्ता, संकोश तथा रायदक दाहिन तट में तथा दिहांग, लोहित और बुढ़ी दिहांग पूर्व से आकर एवं धनश्री, | कलांग और कपिली इसके बाएं तट में आकर मिलती है।

तिस्ता

| यह ब्रह्मपुत्र की सबसे पश्चिमी दाहिनी तट की सहायक नदी है। । कंचनजंगा से निकलते हुए यह दार्जिलिंग के पहाड़ियों में एक तीव्र पर्वतीय प्रवाह है, जिसमें रांगपो, रंगित तथा सेबक जैसी सहायक नदियां आकर मिलती हैं। इसके तट पर जलपाईगुड़ी शहर स्थित है।

रंगित

सिक्किम से उद्गमित रंगित नदी में बड़ी संख्या में क्षिप्तिकाएं हैं। यह । नदी पूरे विश्व में जल क्रीड़ा ‘रॉफ्टिंग’ के लिए प्रसिद्ध है।

संकोश

यह भूटान की सबसे प्रमुख नदी है। धुबरी से नीचे यह नदी ब्रह्मपुत्र से | जाकर मिलती है।

मानस

यह एक पूर्ववर्ती नदी है। तिब्बत से निकलकर यह वृहत् हिमालय में एक महाखड्ड का निर्माण करते हुए प्रवेश करती है।

सुबनसिरी

यह ब्रह्मपुत्र नदी की एक बड़ी सहायक नदी है। हिमालय क्षेत्र में इस नदी का मार्ग लम्बा है।

यह मिरि पहाड़ियों तथा अबोर पहाड़ियों को विभाजित करती है।

धनश्री

यह नदी नागा पहाड़ियों से निकलती है तथा नौगांव के बीच लगभग 300 किमी. बहने के बाद यह ब्रह्मपुत्र नदी में जाकर मिलती है।

मणिपुर नदी

यह नदी मणिपुर के उत्तरी भाग से निकलती है तथा दक्षिण की ओर बहती है।

इम्फाल से गुजरते हुए, यह नदी लोकटक झील को अपवाहित करती है तथा चिंदविन घाटी में जाकर मिलती है, जो म्यांमार में इरावदी की सहायक नदी है।

कालदान नदी

यह नदी मणिपुर के दक्षिणी भाग को अप्रवाहित करती है, जहां यह दक्षिण की ओर बहती है तथा बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है।

बराक नदी

यह नदी नागालैंड में माउंट जापोवा से निकलती है, मणिपुर में दक्षिण की ओर बहती है तथा एक कैची मोड़ लेती है। इसकी अनेक सहायक । नदियां, जो मिजोरम के उत्तरी भाग को अपवाहित करती है, एकजुट होकर सिलचर तथा काछार जिले से होकर गुजरती है। बराक बेसिन में मासिनराम तथा चेरापूंजी है, जहां विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है। To ढाका के नीचे चांदपुर में बराक नदी पद्मा से मिलती है, जिसके बाद संयुक्त रूप से सूरमा (बराक) तथा पदमा मेघना कहलाती है।

प्रायद्धीपीय भारत की प्रमुख nadiya

नदी स्रोत लम्बाई मुख्य सहायक नदियां
गोदावरी त्रयम्बक पहाड़ी (नासिक ) 1465 मंजरी , पेनगंगा , वर्धा , वेनगंगा , ईन्द्रवती , सबरी , प्राणहिता
क्रष्णा महाबलेश्वर के नजदीक ( महाराष्ट्र) 1400 कोयना , घाट प्रभा , माल प्रभा , भीमा , तुंगभद्र , मूसी , मुनेरू
नर्मदा अमरकंटक ( मध्य प्रदेश ) 1310 हिरण , ओरसांग , कोलार , बुरेनु
महानदी दंडकारणय पठार ( 36 गढ़ ) 857 इब , मांड , तेल , संदूर
कावेरी ब्रह्मगिरी ( कर्नाटक ) 800 हेमवती , लोकपावनी , शिमशा , अमरावती
तापी बैतूल जिले में मुलताई ( mp ) 730 पूर्णा , बैतूल , गोमाई
प्रायद्धीपीय भारत की प्रमुख nadiya
लूनी नदी

लूनी नदी अजमेर के निकट अरावली श्रेणी से निकलती है तथा इसके बाएं तट में अनेक सहायक नदियां, जैसे-बांदी, सुकरी तथा जवाई आकर ! मिलती है। वे नदियां जो अजमेर से दक्षिण अरावली श्रेणी के पश्चिमी पार्श्व को अपवाहित करती हैं मौसमी नदियां होती हैं। लूनी नदी बलोतरा के नीचे खारी हो जाती है तथा दक्षिण की ओर कच्छ की दलदल भूमि (रन का कच्छ) में जाकर समाप्त हो जाती है।

बनास नदी

यह नदी माउंट आबू से निकलती है तथा पालमपुर होकर बहते हुए। कच्छ की दलदल भूमि में जाकर मिलती है।

साबरमती नदी

यह नदी अरावली श्रेणी के दक्षिणी ढाल को अपवाहित करती है साबरमती में सहायक नदियां इसके पूर्वी पार्श्व में आकर मिलती है तथा यह नदी खंभात की खाड़ी में मिलने से पहले लगभग एक उत्तरी-दक्षिणी मार्ग में बहती है।

माही नदी

माही नदी का स्रोत मध्य प्रदेश की विंध्य पहाड़ियों में है। यह दक्षिण-पश्चिम की ओर आणंद तथा बनासवाड़ा जिले से होकर गुजरती है | तथा अन्ततः एक मुहाना बनाकर खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है। शरावती नदी

यह नदी कर्नाटक के शिमोगा जिले से निकलती है तथा गारसोपा | जलप्रपात उत्पन्न करती है, यह भारत का सबसे भव्य जलप्रपात है जो जोग जलप्रपात 253 मीटर के नाम से प्रसिद्ध है। पश्चिमी घाट के अखंड । जल विभाजक में एकमात्र दर्रा 13 किमी. चौड़ी पालक्कड़ दर्रा है, जिसे पालघाट भी कहते हैं। पोन्नानी नदी जो इस दर्रे से होकर पश्चिम की ओर

बहती है, एक अनुपयुक्त नदी प्रतीत होती है।

नर्मदा नदी

नर्मदा नदी मैकाल पहाड़ियों में अमरकंटक पठार से निकलती है। । उत्तर-पश्चिमी दिशा में यह नदी जबलपुर के निकट एक जटिल मार्ग से । होकर गुजरती है। नर्मदा नदी कुछ प्रभावशाली महाखड्डों से होकर गुजरती है, जिसमें सबसे भव्य है- जबलपुर के निकट धुंआधार जलप्रपात। जबलपुर से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए यह नदी विंध्य तथा सतपुड़ा श्रेणियों के बीच । एक विभ्रंश घाटी से होकर गुजरती है।

दक्षिण भारतीय नदियाँ

तापी नदी

इसकी लम्बाई 700 किमी. तथा अपवाह बेसिन 66,900 वर्ग किमी. | है। तापी नदी सतपुड़ा श्रेणी से निकलती है तथा सतपुड़ा के समानांतर • पश्चिम की ओर बहती है। खंडवा-बुरहानपुर दर्रे के निकट नर्मदा तथा तापी एक दूसरे के करीब आ जाती है। जलगांव के नीचे यह नदी नर्मदा की ही तरह विभ्रंश घाटी में बहती है लेकिन उत्तर में सतपुड़ा श्रेणी तथा | दक्षिण में अजन्ता श्रेणी के बीच एक अत्यंत संकुचित रूप में बहती है। । सूरत शहर के नीचे यह एक मुहाना बनाती है तथा खंभात की खाड़ी में जा मिलती है।

स्वर्णरेखा नदी

यह नदी रांची के दक्षिण-पश्चिम से निकलती है, जहां इसके अनेक जलप्रपात हैं पूर्वी दिशा में बहते हुए यह जमशेदपुर से होकर गुजरती है। शीत तथा बालासोर के निकट बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है। इसका अपवाह बेसिन, झारखंड, उड़ीसा तथा प. बंगाल राज्यों में पड़ता है।

ब्राह्मणी

यह नदी कोयल तथा शंख नदियों के संगम से बनती है। यह नदियां राउरकेला में जाकर मिलती हैं तथा गढ़जात पहाड़ियों के पश्चिमी भाग को अपवाहित करती है। यह नदी बोनाई, तलचर एवं बालासोर जिलों से होकर | गुजरती है तथा बंगाल की खाड़ी में पाराद्वीप बंदरगाह के ऊपर जाकर मिलती है।

महानदी

यह छत्तीसगढ़ बेसिन से निकलती है तथा रायपुर के पूर्वी एवं पश्चिमी के भाग को अपवाहित करती है। अपने शुरूआती चरण में यह नदी उत्तर-पूर्व की ओर बहती है तथा दोनों तटों पर अनेक नदियों, उदाहरण के लिए –

शिवनाथ तथा संदूर के मिलने के बाद 200 से 700 मीटर की ऊंचाई के | मध्य संयुक्त रूप से जल का निकास पूर्व की ओर एक महाखड्ड (गॉर्ज) के द्वारा होता है, यहां जल को अवरूद्ध कर हीराकुंड बांध का निर्माण किया गया है।

गोदावरी

गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है। इसे ‘वृद्ध गंगा’ के उपनाम से भी जाना जाता है। यह पश्चिमी घाट में नासिक के नीचे एक झरने से निकलती है तथा पूर्वी एवं दक्षिणी-पूर्वी महाराष्ट्र बस्तर पठार (छत्तीसगढ़) तथा तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आंध्र क्षेत्र को अपवाहित करती है। इसकी अनेक सहायक नदियां है, विशेषकर इसके बाएं तट पर, पूर्णा, मनेर, पेनगंगा, प्राणहिता (वेनगंगा तथा वर्धा संयुक्त रूप से), इंद्रावती, ताल तथा सबरी तथा दाहिने तट की सबसे प्रमुख सहायक नदी है मंजरा।।

कृष्णा

कृष्णा नदी का उद्गम महाबलेश्वर के निकट है। अनेक छोटी नदियां, जैसे- कोयना तथा घाटप्रभा कृष्णा में आकर मिलती है, उत्तर में भीमा तथा दक्षिण में तुंगभद्रा इसकी अन्य सहायक नदियां है।

पेन्नार

यह नदी दक्षिण मैसूर पठार के कोलार जिले से निकलती है। इसकी मुख्य सहायक नदियां चित्रावती तथा पापाघनी है। यह कुडप्पा क्वार्ट्जाइट के एक महाखड्ड से होकर गुजरती है तथा बंगाल की खाड़ी में एक । मुहाना के रूप प्रवेश करती है।

गंगा की ही तरह एक पवित्र नदी है। इसलिए इसे ‘दक्षिण की गंगा’ भी कहा जाता है। इसका स्पष्टीकरण ब्रिटेनिका इनसाइक्लोपीडिया में दिया गया है। यह मैसूर पठार के दक्षिणी भाग से एक पथरीली पर्वतीय नदी के रूप में निकलती है तथा क्षिप्तिकाओं, प्रपातों एवं जलप्रपातों का निर्माण करती है। इसका अपवाह बेसिन ग्रीष्मकालीन मानसून, पश्चगमन मानसून तथा

शीतकालीन मानसून के दौरान वर्षा प्राप्त करती है। मैसूर से 20 किमी. ऊपर . इस नदी पर बांध बनाकर कृष्णासागर जलाशय का निर्माण हुआ है। यह । श्रीरंगपट्टनम तथा शिवसमुद्रम द्वीप से होकर गुजरती है। शिवसमुद्रम के चारों ओर नहरे क्षिप्तिकाओं के एक अनुक्रम का निर्माण करती हैं, जिन्हें उपयोग कर जल बिजली संयंत्र का विकास 1902 में किया गया।

अमरावती

अमरावती, कावेरी नदी की सहायक नदी है। इसका उद्गम केरल और । तमिलनाडु की सीमा पर है तथा इसकी लंबाई 175 किमी. है। यह करूर । जिले में कावेरी से मिलती है।

ताम्रपर्णी

10 तिरुनेवेली जिले की नदी। यह पश्चिम घाट के पालनी पहाड़ियों के ढाल से निकलती है तथा मुदरै से गुजरती है। यह रामनाथपुरम प्रायद्वीप से होकर यह नदी मन्नार की खाड़ी में जाकर मिलती है।

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अवश्य पढ़े – भारत की झीलें | भारत के जलप्रपात | lakes and water falls of india

 

abhishekyadav

मेरा नाम अभिषेक यादव, में uppcs की तैयारी करता हूँ हम इस ब्लॉग पर uppcs के सारे विषय पर post डालता हूँ

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