समास की सम्पूर्ण जानकारी | परिभाषा उदाहरण सहित और pdf

समास का शाब्दिक अर्थ :-

समास की सम्पूर्ण जानकारी…

संक्षेप ,सामानिक पद ,समस्त पद , सम्पूर्ण पद

समास की परिभाषा :-

1. एक शब्दांस +एक शब्द मिलकर समास बनता है जैसे – आमरण ,निर्गत ,दुश्चरित ,दुस्साहस निसन्देह आदि

2.एक शब्द +एक शब्द जैसे – माता -पिता ,रात-रात , चाय-वाय , आपवीती , दही – बड़ा

समास क्या है उदाहरण सहित:-

समास के 6 भेद :-

Table of Contents

1. अव्यीभाव समास :-

इसमें अव्यय +भाव होता है |

उपसर्ग अव्यय निपात
प्रति+वर्ष=प्रतिवर्ष आजकल यथा+रूप=यथारूप
आ+मरण=आमरण धीरे-धीरे तथा+योग्यता=तथायोग्यता
निर+विरोध=निर्विरोध अब-तक इति+सिद्धम्=इतिसिद्धाम
निस+सन्देह=निसन्देह जल्दी-जल्दी भर+पेट=भरपेट
दुस+साहस=दुस्साहस यहाँ-यहाँ यथा+शक्ति=यथाशक्ति
दुश+चरित=दुश्चरित अलग-अलग
दुश+परिणाम=दुष्परिणाम
निष्+चित=निश्चित
अव्यीभाव समास के उदाहरण

ये जो उपसर्ग ,अव्यय ,निपात ये बदलते नहीं है और अव्ययीभाव में आगे वाला शब्द इन्ही में होता है |

अव्ययीभाव समास द्वन्द्व समास अव्ययीभाव समास
दिनोदिन दिन-दिन जल्दी-जल्दी
रातोरात रात-रात अलग-अलग
बातोंबात बात-बात धीरे-धीरे
हाथोहाथ हाथ-हाथ यहाँ-यहाँ
कानोकान कान-कान तेज-तेज
अव्ययीभाव और द्वन्द्व में अंतर
  1. अव्ययीभाव समास में प्रथम पद प्रधान होगा जो हमेशा उपसर्ग,निपात और अव्यय के रूप में पाया जाएगा
  2. अव्ययीभाव में यदि शब्द की आव्रति विना योजक चिन्ह के होती है तो वे अव्ययीभाव समास होंगे जैसे-दिनोंदिन ,रातोरात
  3. यदि शब्द की आव्रति योजक चिन्ह के साथ होती है तो वह दुंद समास कहलाते है जैसे – दिन-दिन
  4. यदि अव्यय शब्द की आव्रति योजक चिन्ह के साथ होती है तो वह अव्ययीभाव समास होंगे जैसे – धीरे-धीरे
  5. अव्ययीभाव समास के सारे उदहारण पुल्लिंग व स्त्रीलिंग को छोड़कर अन्य लिंग के होते है

2.द्धन्द्ध समास:-

समास की सम्पूर्ण जानकारी..

द्धन्द्ध अपभ्रंश का शब्द है (हिंदी का पालन पोषण अपभ्रंश को ही माना जाता है )

  1. इसमें दोनों पद प्रधान होते है जैसे – राम-रावन , कृष्ण-कंश
  2. जहाँ कही प्रतियोगिता ,प्रतिस्पर्द्दा ,प्रतिदुन्द्ता का भाव दिखाई दे वे द्धन्द्ध समास कहलाते है
pratiyogta pratisprddh प्रतिद्धन्द्धता
राम-रावण कर्णोर्जुन भीम-दुर्योधन
कृष्ण-कंस किरातार्जुन मोदी-केजरीवाल
द्धन्द्ध समास के उदाहरण

4.इसमें ये एक दुसरे के विपरीत होते है या विलोम शब्द

5. योजक चिन्ह वाले संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण ,क्रिया शब्द होते है

6. आव्रति होती हो संज्ञा सर्वनाम विशेषण क्रिया शब्दों की जैसे – दिन-दिन , रात-रात, हरा-हरा ,चल-चल

7. अर्द्धआव्रति /पुनरुक्ति या सार्थक -निरर्थक शब्द युग्म जैसे – चाय-वाय ,पानी-वानी, भारत-आरत , धागा-वागा आदि

8. सम्बंध है तो वह द्धन्द्ध समास कहलायेगा जैसे -भाई-बहन ,गुरु-शिष्य ,पति-पत्नी ,जीजा-साली, राम-लक्षमण , लवकुश

9. तीन शब्द का योग | दो अधिक शब्द होने पर जैसे – लाल-वाल-पाल , तन-मन-धन ,रोटी-कपडा-मकान , आन-वान-शान

10. एक से 10 तक की सख्या 10,20,30,40,50,60,70,80,90,100 दस का गुणज नहीं हो वह सख्या द्धन्द्ध समास होगी जैसे – वारह – 10 और 2 , पचपन – पाच और पाच

11. समास विग्रह करते समय और ,या ,अथवा, व, तथा, अव्यय शब्द का प्रयोग होता है

3. कर्मधारय समास :-

  • इसे कहते कार्य धारण करने वाला
  • विशेषण – विशेष्य इसमें विशेषण को पहचान ,गुण , दोष, विशेषता, बताना होता है और विशेष्य में जिसकी गुण , विशेषता वताई जाए जैसे – नीलकण्ड ,नीलगाय ,पीताम्बर , महात्मामहापुरुष , पुर्षोत्मक
  • उपमान -उपमेय जिससे तुलना की जाय उसे उपमान और जिसकी तुलना की जाय उसे उपमेय कहा जाता है जैसे – चंद्रमुख , देहलता ,मुखचन्द्र , कनकलता ,म्रगनायानी गजगामनी ,कमलनयन
  • गुण-गुणी —जैसे – वीर-पुरुष , साहसी-सैनिक , कर्मठ-नेता , ईमानदार-शिक्षक
  1. कर्मधारय समास में उत्तर पद /दूसरा पद / तीसरा पद / बाद वाला पद प्रधान होता है
  2. कर्मधारय समास तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है
  3. कर्मधारय समास समनाधिकरण तत्पुरुष समास का एक भेद है
  4. कर्मधारय समास के अन्यनाम – विशेषण-विशेष्य वाला समास , उपमान-उपमेय
  5. समास विग्रह करते समय -के समान ,जैसा , जो , रूपी शब्दों का प्रयोग होता है

जैसे – तीन नेत्रों का समूह – द्धिगु / चन्द्रमुख – चन्द्र जैसा मुख

तीन नेत्र है जो – कर्मधारय / पीताम्बर – पीला है जो वस्त्र

तीन नेत्र वाला – वहुब्रीही / कमलनयन – कमल के समान नयन , कमल रूपी नयन

4.द्धिगु समास :-

ये शब्द अपभ्रंश का है

द्धिगु शब्द सख्यावाची भी है

  1. पहला पद संख्यावाची दूसरे पद की प्रधानता होती है
  2. समूहवाची शब्द भी होते है जैसे – सप्ताह , दशक , शतक , शताब्दी आदि

note – पंजाब – पांच नदियों का समूह / चवन्नी – चार आनो का समूह

जैसे :-

दोपहर,दौराह,त्रिराह,त्रिमुनी,त्रिनेत्र,त्रिकोण,त्रिभुज,चौराह ,चौमासा,चारपाई,चतुर्भुज,चतुरानन, पंचवटी ,पंचाग,
पंचनगरी ,श्नानन, सप्तांग,सप्तमी ,
द्धिगु समास उदहारण

5.वहुव्रीहि समास :-

वहुव्रीही समास में अन्य पद प्रधान होता या विशेष पद प्रधान होता है

note- जिन नगरी वा शहरो को वसाया गया या आबाद किया गया हो वे नगरो के नाम बहुब्रीहि समास होंगे

जैसे –

  • जयपुर – राजा जयसिंह द्धारा वसाया गया पुर
  • जोधपुर – राजा जोधा के द्धारा वसाया गया पुर
  • हैदराबाद – हैदर अली ने आबाद किया है जिसे
  • तुगलकाबाद – राजा तुगलक ने आबाद किया है जिसे

और उद्धहरण देखो

  • एकदंत -गणेश
  • त्रिनेत्र – शिव
  • त्रिवेदी- ब्राहमण ज्ञाता
  • त्रिवेणी – नदियों का संगम
  • त्रिलोकी – विष्णु
  • चतुरानन – ब्रम्हा
  • चतुर्मुख – विष्णु
  • चतुर्भुज – विष्णु
  • षडानन – कार्तिकेय
  • सप्तार्शी – सात ऋषि
  • अष्टाध्यायी – पाणनी की पुस्तक
  • दशानन -रावण
  • पीताम्बर – विष्णु
  • श्वेताम्बर – जैनी
  • दिगम्बर – जैनी
  • हलधर – वलराम
  • गंगाधर – शिव
  • चक्रधर – विष्णु
  • गदाधर -हनुमान
  • चक्रपाणी – विष्णु
  • पंकज – कमल
  • जलद – बादल
  • जलधि -समुद्र
  • गजानन -गणेश
  • गजोधर -गणेश
  • लम्बोधर -गणेश

6. तत्पुरुष समास :-

परिभाषा– विभक्तियों के नामो के अनुसार छह भेद है –

तत्पुरुष समास का उदाहरण क्या है :-

  1. कर्म तत्पुरुष समास
  2. कारण तत्पुरुष
  3. सम्प्रदान तत्पुरुष
  4. अपादान तत्पुरुष
  5. संबंध तत्पुरुष
  6. अधिकरण तत्पुरुष

कर्म तत्पुरुष समास :-

इसमें कारक की विभक्ति को का लोप होता है जैसे –

समस्त पद विग्रह
गगनचुम्बी गगन को चूमने वाला
यशप्राप्त यश को प्राप्त
चिडीमार चिड़ियाँ को मारने वाला
ग्रामगत ग्राम को गया हुआ
रथचालक रथ को चलने वाला
जेबकतरा जेब को कतरने वाला
कर्म तत्पुरुष समास के उदाहरण

कारण तत्पुरुष समास :-

इसमें कारण करक की विभक्ति से और के द्धारा का लोप होता है जैसे –

समस्त-पद विग्रह
करुणापूर्ण करुना से पूर्ण
भयाकुल भय से आकुल
रेखांकित रेखा से अंकित
शोकग्रस्त शोक से ग्रस्त
मदांध मद से अंधा
मनचाहा मन से चाहां
पददलित पद से चलित
सुरचारित सुर द्धारा रचित
कारण तत्पुरुष समास के उदाहरण

सम्प्रदान तत्पुरुष :-

इसमें सम्प्रदान करक की विभक्ति के लिए का लोप होता है जैसे –

समस्त-पद विग्रह
प्रयोगशाला प्रयोग के लिए शाला
स्नानघर स्नान के लिए घर
यज्ञशाला यज्ञ के लिए शाला
गौशाला गोउ के लिए शाला
देशभक्ति देश के लिए भक्ति
डाकगाड़ी डाक के लिए गाडी
परीक्षा भवन परीक्षा के लिए भवन
हाथकड़ी हाथ के लिए कड़ी
सम्प्रदान तत्पुरुष समास के उदाहरण

अपादान तत्पुरुष :-

इसमे अपादान करक की विभक्ति होती है से (अलग होने का भाव )

समस्त-पद विग्रह
धनहीन धन से हीन
पथभ्रष्ट पथ से भ्रष्ट
पदच्युक्त पद से च्युक्त
देशनिकाला देश से निकाला
ऋणमुक्त ऋण से मुक्त
गुणहीन गुण से हीन
पापमुक्त पाप से मुक्त
जलहीन जल से हीन
अपादान तत्पुरुष समास के उदाहरण

संबंध तत्पुरुष :-

इसमें संबंध करक की विभक्ति का ,के ,की लुप्त हो जाती है जैसे –

समस्त-पद विग्रह
राजपुत्र राजा का पुत्र
राजाज्ञा राजा की आज्ञा
पराधीन पर के अधीन
राजकुमार राजा का कुमार
देशरक्षा देश की रक्षा
शिवालय शिव का आलय
गृहस्वामी गृह का स्वामी
विध्यासागार विद्या का सागार
संबंध तत्पुरुष समास के उदाहरण

अधिकरण तत्पुरुष :-

इसमें अधिकरण कारक की विभक्ति में ,पर लुप्त हो जाती है

समस्त पद विग्रह
शोकमग्न शोक में मग्न
पुरुषोत्तम पुरुष में उत्तम
आपबीती आप पर बीती
गृहप्रवेश गृह में प्रवेश
लोकप्रिय लोक में प्रिय
धर्मवीर धर्म में वीर
कलाश्रेष्ठ कला में श्रेष्ट
आनंदमग्न आनंद में मग्न
अधिकरण तत्पुरुष समास के उदाहरण

note :- तत्पुरुष समास के उपरोक्त भेदों के अलावा कुछ अन्य भेद भी है जिनमे प्रमुख है नन्न समास |

इन्हें भी जरुर पढ़े :- प्राचीन धार्मिक आंदोलन

और भी

abhishekyadav

मेरा नाम अभिषेक यादव, में uppcs की तैयारी करता हूँ हम इस ब्लॉग पर uppcs के सारे विषय पर post डालता हूँ

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