ट्रस्टीशिप का सिद्धांत

ट्रस्टीशिप का सिद्धांत

1860 के बाद british शासन ने भारत में अपने आप को स्वराज का शिक्षक कहने के स्थान पर अपने को ट्रस्टी कहना शुरू कर दिया इसका तात्पर्य यह था की अंग्रेज भारत के साधनों का प्रवंधन इस तरीके से करेंगे की भारतीयों की अधिकतम भलाई हो सके .

ट्रस्टीशिप का दावा इस तरीके कर रहे थे अंग्रेज – 1. भारत में अंग्रेजो का शासन भारतीयों के लिए जरुरी है

2. अंग्रेज सभ्य है और भारतीयों की सेवा करने का उनका दायित्व है

3. भारतीय अपना शासन नहीं सभाल सकते क्योकि डेमोक्रेसी पशिचमी जलवायु की उपज है

ट्रस्टीशिप की कहानी :-

ट्रस्टीशिप का सिद्धांत-

अंग्रेज 1860 के दोरान यह कहा करते थे की हट्रस्टीशिप का सिद्धांतम भारत के लोगो को स्वाराज्य सिखायंगे स्वराज्य का मतलव अपना राज्य इसका लोगो का तंत्र यानी अपना लोकतंत्र है स्वराज्य की शिक्षा देने की बात अंग्रेज करते थे तो धीरे धीरे भारत के लोगो ne यह उम्मीद पालना शुरू कर दिया की एक ना एक दिन हमको स्वाराज्य मिलेगा तो अब भारतीयों ने यह भी डिमांड कर दी अगर तुम हमको स्वराज्य देने की बात करते हो तो हमको शासन में भागेदारी तो दो राजनितिक सुधार करके धीरे धीरे हमको स्वराज्य के लायक तो बनाओ अंग्रेज कहते थे की हम तुमको पहले स्वराज्य की शिक्षा देगे जब हमको लगने लगेगा की तुम स्वराज्य सभाल लोगे तो हम सब कुछ छोड़ कर चले जायगे

तो भारतीयों को लगने लगा की एक दिन अंग्रेज हमको स्वराज्य देकर चले जायेंगे तो अंग्रेज भारतीयों के अन्दर इस स्वाराज्य की उपज से डरने लगे और 1857 के विद्रोह के वाद उनका डर और भी बड गया क्योकि बहुत सारे लोग भारत में आजादी की कामना करने लगे थे और जो भारतीय अंग्रेजो के शासन के दोरान अंग्रेजी पढे लिखे थे english litlature , english political since , english history आदि पढके राष्टवाद , लोकतंत्र , विचारो से प्रेरणा लेना शुरू कर दिए थे

इससे अंग्रेज बहुत डर गये अचानक अंग्रेजो के दिमाक में एक बात आई की कियो न हम स्वराज्य की शिक्षा वाली बात को ख़त्म कर दे तो उन्होंने एक मधुर लहजे वाले एक वयान रखा की आज से हम स्वाराज्य की शिक्षा की जो बात कही थी वो हम आज से ख़त्म कर रहे है क्योकि हमको एक बात एक बात समझ आ गई की लोकतंत्र भारत को शूट नहीं करेगा लोकतंत्र शासन वो प्रणाली है जो की ठन्डे मुल्को में ही प्रयोग हो सकती है

अब हम भारत में स्थाई रूप से अनंत काल तक शासन करंगे ये कहा अंग्रेजो तो ये उठा की तुम ही शासन किओ करोगे तो अंग्रेजो ने प्राचीन काल के शासको का उदाहरण दिया की वे कितने अत्याचारी होते थे हम वेसे नहीं है हम यहं क्यों आये की सफ़ेद लोग सभ्य हो गये है तो हमरे कंधे पर एक जिम्मेदारी है की जो लोग विकास के दोर में पीछे रह गये उन्हें भी साथ लेकर दौड़ा जाये इसे कहते है (whit mens borden theory )

यह कहा जा सकता है की अंग्रेज भारत में अपने शासन को दीर्घजीवी बनाने के लिए ट्रस्टीशिप का विचार गठे थे लेकिन इस दौरान भारतीयों को अंग्रेजी शासन के साम्राज्यवादी नीति की समझ आने लगी थी और एक बड़ा तबका यह समझने लगा था की भारत की ये दुर्दशा के लिए british शासन ही दोषी है और ट्रस्टीशिप का उनका दावा भ्रामक है

 अवश्य पढ़े —-अंग्रेजो का नस्लीय भेदभाव क्या था angrejo ka nasliy bhedbhav

                      चार्टर एक्ट 1833

abhishekyadav

मेरा नाम अभिषेक यादव, में uppcs की तैयारी करता हूँ हम इस ब्लॉग पर uppcs के सारे विषय पर post डालता हूँ

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