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जैन धर्म का इतिहास क्या है | jainism in hindi

महावीर का जन्म :-

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जैन धर्म का इतिहास….

श्वेताम्बर की मान्यता के अनुसार -महावीर का जन्म देवनंगा नामक स्त्री की कोख से हुआ था

जो बाकी के 23 तीर्थंकर थे ये सब क्षत्रीय की कोख से जन्मे थे तो इसी लिए इन्हे भी क्षत्रिय देवनगा की कोख से बताया है

महावीर स्वामी का जीवन परिचय :-

महावीर स्वामी गौतम बुद्ध से इस लिए अलग थे की महावीर स्वामी के माता – पिता का देहांत हो जाने के बाद वो अपने बड़े भाई की आज्ञा लेकर घर त्यागे थे लेकिन buddh घर से भाग गये थे |

स्वामी महावीर ने घर त्याग कर कठोर तपस्या की लगभग 12 वर्ष तक इसी तपस्या के क्रम में उनका एक साथी था जो आजीवक धर्म का संस्थापक था मख्खिलिगोशाल इन्होने महावीर का साथ तव छोड़ा जब महावीर ने वस्त्र त्याग दिए थे जो ज्ञान प्राप्त हुआ महावीर को 12 की तपस्या से उसी ज्ञान की की कैवल्य कहते है कैवल्य मतलवसम्पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति

तीर्थंकर किसको कहा जाता है :-

जिस व्यक्ति को सम्पूर्ण ज्ञान की प्रप्ति हो जाय और वह व्यक्ति दुसरो का मार्गदर्शन करे उसको तीर्थंकर कहा जाता था, महावीर स्वामी को सम्पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी |

जैन धर्म के तीर्थंकर :-

जैन धर्म का इतिहास…

note – total 24 तीर्थंकर थे

प्रथम तीर्थंकर:- रिषभ देव

इनका नाम ऋग्वेद में भी आया था और इन्हें आदिदेव भी कहा जाता था

23 वा तीर्थंकर :- पार्श्वनाथ –

8th शताब्दी में जन्मे थे वाराणसी के एक राजा के घर में पैदा हुए थे पार्श्वनाथ के अनुयाई थे महावीर के माता-पिता

पार्श्वनाथ की शिक्षा :-

ये कहते थे की अहिंसा , अस्तेय , अपरिग्रह , सत्य के रास्ते पर चलो | पार्श्वनाथ की शिक्षा को महावीर ने आगे ले गए थे

पार्श्वनाथ की शिक्षा :-

पार्श्वनाथ की शिक्षा में 4 शब्द थे की अहिंसा , अस्तेय , अपरिग्रह और सत्य

इसमें 5व शब्द ब्रह्मचर्य महावीर ने जोड़ा था इसी को 5 महाव्रत भी कहते है इसको कठोर कर दिया महावीर ने |

24व तीर्थंकर महावीर ने क्या कठोर कर दिया :-

महवीर का मानना था की सत्य के रास्ते चलो असत्य का विचार भी असत्य है जैन धर्म का इतिहास में महावीर को माना गया है |

अहिंसा :-

अहिंसा ,मंसा ,वाचा , करमा कही भी हिंसा नहीं होनी चाहिए

स्वामी जी कह रहे थे की तुम चलते हो तो तुम्हारे पाँव के नीचे कीड़े दाव कर मर जाते है तो ये भी हिंसा है तुम खेती करते हो ये भी हिंसा है कियो की खेत जोतने पर कीड़े मरते है

तुम अगर कोई भी ऐसा काम करते हो जिससे जीव की म्रत्यु होती है उसे हिंसा ही कहा जाएगा महावीर की इस कठोरता के नियम को किसानो ने इनका समर्थन नहीं किया सबसे ज्यादा इनके अनुयाई व्यापारी हुए थे

अस्तेय :-

मतलव चोरी नहीं करनी

अपरिग्रह :-

धन इकठ्ठा नहीं कारना यह तक ये वस्त्र को भी धन मानते थे इसी लिए वस्त्र त्याग दिए थे

ब्रह्मचर्य:-

इसका पालन केवल भिक्षुक ही कर सकते थे उपासक नहीं कर सकते थे

भिक्षुक – जो व्यक्ति अपना घर त्याग और शादी न करे कभी स्त्री के साथ सम्भोग न करे उसे भिक्षुक कहते है |

उपासक – उपासक एक सामान्य व्यक्ति बन सकता है |

जैन धर्म के सिध्दांत :-

  1. महावीर स्वामी कर्म केआधार पर ब्राह्मण को मानते थे ब्राह्मण वो होगा जिसमे नैतिकता ,ज्ञान ,त्याग ,तपस्या हो वही ब्राह्मण होगा |
  2. महिलाओं को भिक्षुणी बनाने का अधिकार दिया अगर पुरुष भिक्षुण और महिला भिक्षुणी एक साथ आ जाए तो महिला भिक्षुण पुरुष भिक्षुण को नमस्कार करेगी |

जैन धर्म के संरक्षक :-

  1. विम्वसार मगध का राजा
  2. प्रसेनजीत कौशल का राजा
  3. नन्द वंशीय राजा
  4. चंदगुप्त मौर्य
  5. खारवेल
  6. बादामी के चालुक्य
  7. राष्ट्रकूट
  8. राजपूत राजा -कुमार पाल (गुजरात का शासक )

note – महावीर ने सबसे पहले ज्ञान उन 11 गणधर को दिया ये सब ब्राह्मण थे और इन्ही के दुआरा जैन धर्म का प्रचार प्रसार हुआ महावीर ने खुद प्रचार नहीं किया था लेकिन दिगम्बर और श्वेताम्बर ये कहते है की उन्होंने प्रचार किया था |

note – अंत में महावीर ने सलेखना की पद्धिति प्राण त्याग दिए थे

जैन धर्म मत विभाजन :-

श्वेताम्बर दिगम्बर
इस सम्प्रदायक के प्रमुख स्थूलभद्र थे इस सम्प्रदायक के प्रमुख भद्रबाहु थे
इनके समर्थक मगध बाले कहलाये इनके समर्थक दक्षिण वाले कहलाये
मोक्ष प्राप्ति हेतु श्वेत वस्त्र त्याग आवश्यक नहीं मोक्ष प्राप्ति हेतु वस्त्र त्याग आवश्यक
इसी जीवन में स्त्रियाँ निर्वाण के योग्य है स्त्रियाँ को निर्वाण की आवश्यकता नहीं
कैवल्य प्राप्ति के उपरांत भोजन की आवश्यकता कैवल्य प्राप्ति के उपरांत भोजन की आवश्यकता नहीं
ये महावीर को विवाहित मानते थे ये महावीर को अविवाहित मानते थे
ये 19 वे तीर्थंकर मल्लिनाथ् को स्त्री मानते थे ये 19वे तीर्थंकर मल्लिनाथ को पुरुष मानते थे
ये जैन आगम ग्रन्थ को स्वीकार करते है ये जैन आगम ग्रन्थ को अस्वीकार करते थे
जैन धर्म मत विभाजन

जैन मुनि :-

महावीर के बाद 11 गणधर हुए इसके बाद मौर्य काल में एक बहुत बड़ा अकाल आया जिसे 12 वर्ष का अकाल माना जाता है अकाल जब आया तब एक जैन भिक्षु हुआ करते थे भद्रबाहु वो चले गये दक्षिण भारत में दक्षिण भारत में जैन धर्म का प्रचारक इन्ही को माना जाता है तो उहाँ से वो 12 वर्ष बाद पाटिलपुत्र वापस आ जाते तो उन्होंने देखा की पाटिलपुत्र में स्थूलभद्र नामक व्यक्ति (ये भी जैन भिक्षु था ) वस्त्र पहन रखा है और उसके अनुयाई भी वस्त्र पहने हुए है भद्रबाहु वस्त्र पहनने के विरुद्ध थे और इन्ही के वीच एक टकराव हुआ और जैन धर्म विभाजन हो गया

और ये tebel ऊपर बनी है |

  • जैन धर्म के संस्थापक कौन थे

    महावीर स्वामी (जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर )

  • महावीर की म्रत्यु

    सलेखना की पद्धिति से

  • महावीर ने सबसे पहले ज्ञान किसको दिया

    11 गणधर

  • महावीर ने पार्श्वनाथ की शिक्षा में किया जोड़ा था

    5 वा मह्व्रत जिसे ब्रह्मचर्य कहा गया

  • 23 वे तीर्थंकर कौन थे

    पार्श्वनाथ

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abhishekyadav

मेरा नाम अभिषेक यादव, में uppcs की तैयारी करता हूँ हम इस ब्लॉग पर uppcs के सारे विषय पर post डालता हूँ

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