कर्नाटक युद्ध ,कर्नाटक युद्ध के परिणाम ,कर्नाटक युद्ध किसके बीच हुआ था

कर्नाटक युद्ध

कर्नाटक के तीन युद्ध हुए हे ;-

  1. प्रथम कर्नाटक युद्ध -(1740-48)
  2. दुतीय कर्नाटक युद्ध -(1749-54)
  3. तृतीय कर्नाटक युद्ध -(1756-63)

प्रथम कर्नाटक युद्ध :-(1740-48)

ये युद्ध कर्नाटक में हुआ था

यूरोप में आस्ट्रिया नाम का एक देश हे आस्ट्रिया के अंतर्गत कहानी ये आई की उहा के राजा की म्रत्यु हो जाने के बाद उत्तराधिकार कोन बनेगा इसी को लेकर दो गुटों में टकराव हुआ एक गुट की तरफ से अंग्रेज और दुसरे गुट की तरफ से फ्रांसीसी लड़ रहे थे

दोनों गुटों के बीच यूरोप में और यूरोप से बहार अमेरिका में भी लडाई शुरू हो गई भारत में भी ये (1744) में एक दुसरे के सामने आ गए

आस्ट्रिया में 1740 में और भारत में 1744 में ये इसी युद्ध के चलते फ्रासीसीयो ने अंग्रेजो से मद्रास छीन लिया ये एक बड़ी घटना थी

सेंट टोमी की लड़ाई :-

यूरोपीय लोग जब इंडिया आये थे तो नोसेना में वो भारतीयों से जायदा शक्तिशाली थे लेकिन थल से यूरोपीय कमजोर थे कियोकी यूरोपीय व्यापारियों के पास हजार दोहजार की सेना थी भारतीय राजाओ के पास 20 हजार -50 हजार की सेना थी और ये सेना मद्यावार्ती राजो के पास थी न की मुग़ल के पास मुगलों के पास लगबग 5 लाख की सेना थी

इसे लिए यूरोपीय साम्राज्य विस्तार रुका हुआ था क्यों की समुद्र में रह कर तो साम्राज्य विस्तार नहीं हो पायगा कुछ बंदरगाही इलाकों पर आपना प्रभाव जमा सकते थे लेकिन साम्राज्य विस्तार नहीं कर सकते थे

लेकिन सेंट टोमी की लड़ाई में फ्रासीसीयो ने कर्नाटक के नबाव अवरुददीन की सेना को पराजित कर दिया था इसे युद्ध से अग्रेजो का भी प्रभाव  वडा था  फ्रांसीसीयो का इस युद्ध में कमांडर था केप्टन पेराडाइज

आस्ट्रिया में अंग्रेज और फ़्रांस की इस लड़ाई में एक सन्धि हुई क्स-ला सापेल नामक जगह पर इसी लिए इस सन्धि को क्स -ला सापेल(1748) की सन्धि कहते ह अब ये युद्ध भारत में भी समाप्त हो गया |

दूसरा कर्नाटक युद्ध :-(1748-54)

फ्रांसीसी लीडर डुप्ले था यह एक अच्छी के साथ भारतीय राज्यों में हस्तछेप लेकर आया था अंग्रेज और फ्रांसीसी के बीच अगर तुलना की जाय तो अंग्रेजो का भारत में आर्थिक आधार फ्रंसीसीयो से 4 गुना ज्यादा था और सेनिक शक्ति भी ज्यादा थी इसे लिए डुप्ले ने एक अच्छी नीति बनाई डुप्ले ने देखा की भारत के अन्दर कई सारे क्षेत्रीय एसे राजा हे

जहा राजनीतिक स्तर पर एक दुसरे के खिलाफ कई शक्तिया लड़ रही हे उत्तराधिकारी का विवाद बना रहता हे डुप्ले ने सोचा की हम अपनी मर्जी के व्यक्ति को गददी पर बेठा दे तो हमें बहुत लाभ होगा | इसी नीती के अनुशार डुप्ले ने दो राजाओ को कर्नाटक और हेदरावाद के साथ यही नीती अपनाया और सफल भी रहा | कर्नाटक में -चन्दासाहव को ,हेदराबाद में -मुजफ्फ्हर जंग को इन दोनों को डुप्ले ने गुंटूर की लड़ाई से गददी पर बेठाया था गुंटूर की लड़ाई भी दुतीय कर्नाटक युद्ध का हिस्सा हे |

त्रिचनापल्ली का घेरा :-

त्रिचनपल्ली एक जगह का नाम हे जहा चले गये कर्नाटक और हेदराबाद के वो सारे के सारे पोलिटिकल लीडर जो हार गये थे गुंटूर की लड़ाई /उत्तराधिकारी में और यही पर अंग्रेजो ने इनको शरण डे दी डुप्ले ने सोचा क्यों न हम त्रिचनापल्ली पर हमला कर अपने सारे दुसमनो को ख़तम कर दे लेकिन ये बात डुप्ले को पता नि थी की अंग्रेजो ने उनको शरण डे दी हे और डुप्ले इसमे हार गया |

ये सब हुआ केसे :-

डुप्ले ने सोचा था की हम त्रिचनापल्ली प् हमला कर अपने दुश्मनों को ख़तम कर देंगे लेकिन अंग्रेजों का नेतृत्व रोवार्ट क्लाइव कर रहा था उसने खुद एक रणनीती सोच कर रखी थी उसने सोच था जेसे फ्रांसीसी त्रचिनापल्ली पर हमला करते हे हम कर्नाटक की राजधानी आर्काट पर हमला कर देंगे तो कर्नाटक का चंदासाह्व फ्रांसीसीयो की मदद नहीं कर पायेगा और हम फ्रंसीसीयो का हरा देंगे  और अन्तं में यही हुआ फ्रांसीसी हार गये अंग्रेजो ने त्रचिनाप्ल्ली जीत लिया और इसके बाद उन्होंने पान्दुचेरी पर हमला किया पान्दुचेरी फ्रंसीसीयो का केंद्र था अंत में पान्दुचेरी की सन्धि हुई 1754 में | इसके बाद डुप्ले को भारत से बापस बुला लिया गया था

तृतीय कर्नाटक युद्ध (1756-63):-

कारण :- सप्त्वर्शीय युद्ध कहा जाता हे

यूरोप के दो देश ब्रिटिश और फ्रेंच ये दुनिया के कई देशो पर कब्जा कर रहे थे जिसमे से एक जगह हे कनाडा और साम्राज्य की स्थापना कर रहे थे कनाडा पर फ्रंसीसीयो का कब्ज़ा था अंग्रेज कब्जा करना चाहिते थे दोनों में युद्ध हुआ यह युद्ध पेरिस की सन्धि से समाप्त हुआ था 1763 में

इसी कारण ये दोनों भारत में भी लड़ते थे अंग्रेजो ने फ्रंसीसीयो के बंगाल के प्रमुख केंद्र चंद्रनगर पर हमला कर दिया और कब्ज़ा कर लिया इसके बाद इस युद्ध की सबसे बड़ी लड़ाई वाडीवांस की लड़ाई हुई यह लड़ाई 1760 में हुई इस लड़ाई में फ्रांसीसी हार गये इस युद्ध में फ़्रांस का नेतृत्व कर रहा था लाली और फ्रांसीसी कमांडर था बूसी

अगली लड़ाई हुई 1761 में पान्दुचेरी की इस पर भी कब्जा कर लिया अंग्रेजो ने  लेकिन अभी अंतर्राष्टीय स्तर युद्ध समाप्त नहीं हुआ 1763 पेरिस की सन्धि से यह युद्ध समाप्त हुआ था

 

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abhishekyadav

मेरा नाम अभिषेक यादव, में uppcs की तैयारी करता हूँ हम इस ब्लॉग पर uppcs के सारे विषय पर post डालता हूँ

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